Life Kundali · मुहूर्त · विवाह मुहूर्त 2027 · वाराणसी
विवाह मुहूर्त 2027 · वाराणसीMarriage muhurat 2027 in Varanasi
वाराणसी में 2027 में विवाह के 37 शुभ मुहूर्त दिन हैं; पहला 15 जनवरी को और अंतिम 13 दिसंबर को। हर दिन वाराणसी के अपने सूर्योदय, सूर्यास्त और घड़ी से निकाला गया है, इसलिए यह सूची दिल्ली की सूची या भारत में छपे कैलेंडर जैसी नहीं है।
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तिथियाँ, महीने-दर-महीने
जनवरीJanuary
- 15 शुक्ररेवती · शुक्ल सप्तमी
- 20 बुधमृगशिरा · शुक्ल त्रयोदशी
- 27 बुधहस्त · कृष्ण षष्ठी
- 31 रविअनुराधा · कृष्ण दशमी
फ़रवरीFebruary
- 11 गुरुरेवती · शुक्ल पंचमी
- 22 सोमउत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण द्वितीया
- 25 गुरुस्वाती · कृष्ण पंचमी
- 27 शनिअनुराधा · कृष्ण सप्तमी
मार्चMarch
- 4 गुरुउत्तराषाढ़ा · कृष्ण द्वादशी
- 10 बुधरेवती · शुक्ल द्वितीया
- 14 रविरोहिणी · शुक्ल षष्ठी
अप्रैलApril
- 16 शुक्रमघा · शुक्ल एकादशी
- 18 रविउत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल त्रयोदशी
- 21 बुधस्वाती · कृष्ण प्रतिपदा
- 23 शुक्रअनुराधा · कृष्ण तृतीया
- 25 रविमूला · कृष्ण पंचमी
- 28 बुधउत्तराषाढ़ा · कृष्ण सप्तमी
मईMay
- 3 सोमउत्तरा भाद्रपदा · कृष्ण द्वादशी
- 8 शनिरोहिणी · शुक्ल तृतीया
- 16 रविहस्त · शुक्ल एकादशी
- 21 शुक्रअनुराधा · कृष्ण प्रतिपदा
- 23 रविमूला · कृष्ण तृतीया
- 30 रविउत्तरा भाद्रपदा · कृष्ण दशमी
- 31 सोमउत्तरा भाद्रपदा · कृष्ण एकादशी
जूनJune
- 5 शनिमृगशिरा · शुक्ल प्रतिपदा
- 10 गुरुमघा · शुक्ल सप्तमी
- 13 रविहस्त · शुक्ल दशमी
- 19 शनिमूला · कृष्ण प्रतिपदा
- 21 सोमउत्तराषाढ़ा · कृष्ण तृतीया
जुलाईJuly
कोई दिन नहीं। इस महीने शुक्र अस्त है।
अगस्तAugust
कोई दिन नहीं। इस महीने चातुर्मास है।
सितंबरSeptember
कोई दिन नहीं। इस महीने चातुर्मास है।
अक्टूबरOctober
कोई दिन नहीं। इस महीने चातुर्मास है।
नवंबरNovember
- 10 बुधउत्तरा भाद्रपदा · शुक्ल द्वादशी
- 11 गुरुरेवती · शुक्ल त्रयोदशी
- 15 सोमरोहिणी · कृष्ण द्वितीया
- 24 बुधहस्त · कृष्ण एकादशी
- 28 रविअनुराधा · शुक्ल प्रतिपदा
दिसंबरDecember
- 8 बुधउत्तरा भाद्रपदा · शुक्ल दशमी
- 9 गुरुरेवती · शुक्ल एकादशी
- 13 सोमरोहिणी · पूर्णिमा
हर पंक्ति में दिन, दोपहर का नक्षत्र और तिथि है। ये दिन हैं, घड़ी का समय नहीं: समय लग्न और दोनों जन्म कुंडलियों से तय होता है।
कुछ महीने ख़ाली क्यों हैं
- चातुर्मास 14 जुलाई से 8 नवंबर तक रहता है: देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी के आरंभ तक।
- खरमास (सूर्य धनु या मीन राशि में) 2027 में 1 जनवरी से 14 जनवरी, 15 मार्च से 14 अप्रैल और 17 दिसंबर से 31 दिसंबर तक पड़ता है।
- शुक्र अस्त (सूर्य के बहुत निकट) 7 जुलाई से 17 सितंबर तक।
- गुरु अस्त (सूर्य के बहुत निकट) 17 अगस्त से 14 सितंबर तक।
- ग्रहण के दिन छोड़े गए हैं: 6 फ़रवरी, 21 फ़रवरी, 18 जुलाई, 2 अगस्त, 17 अगस्त।
यदि आपके परिवार में खरमास या चातुर्मास नहीं माना जाता
ये दोनों परंपरा के नियम हैं, जो उत्तर और पश्चिम भारत में और विदेश में बसे अधिकांश उत्तर भारतीय परिवारों में माने जाते हैं। दक्षिण की और कुछ क्षेत्रीय परंपराएँ इन्हें नहीं मानतीं। इनके बिना 2027 में वाराणसी के लिए 28 दिन और बाक़ी सारी कसौटियों पर खरे उतरते हैं। आपके परिवार की रीति क्या है, यह अपने पंडित जी से पूछिए।
- 2 जनवरी · शनि · स्वाती
- 4 जनवरी · सोम · अनुराधा
- 8 जनवरी · शुक्र · उत्तराषाढ़ा
- 9 जनवरी · शनि · उत्तराषाढ़ा
- 20 मार्च · शनि · मघा
- 22 मार्च · सोम · उत्तरा फाल्गुनी
- 25 मार्च · गुरु · स्वाती
- 27 मार्च · शनि · अनुराधा
- 29 मार्च · सोम · मूला
- 7 अप्रैल · बुध · रेवती
- 11 अप्रैल · रवि · रोहिणी
- 12 अप्रैल · सोम · मृगशिरा
- 18 सितंबर · शनि · रेवती
- 22 सितंबर · बुध · रोहिणी
- 27 सितंबर · सोम · मघा
- 30 सितंबर · गुरु · हस्त
- 2 अक्टूबर · शनि · स्वाती
- 4 अक्टूबर · सोम · अनुराधा
- 15 अक्टूबर · शुक्र · रेवती
- 20 अक्टूबर · बुध · मृगशिरा
- 25 अक्टूबर · सोम · मघा
- 27 अक्टूबर · बुध · उत्तरा फाल्गुनी
- 31 अक्टूबर · रवि · अनुराधा
- 5 नवंबर · शुक्र · उत्तराषाढ़ा
- 18 दिसंबर · शनि · मघा
- 23 दिसंबर · गुरु · स्वाती
- 25 दिसंबर · शनि · अनुराधा
- 29 दिसंबर · बुध · उत्तराषाढ़ा
दिन आधा उत्तर है। उस दिन के भीतर का समय लग्न से और जिनके लिए संस्कार है उनके जन्म नक्षत्र से चुना जाता है। मुहूर्त पत्र आपकी तिथियों और आपके शहर के लिए यही निकालता है।
अपनी तिथियों का समय निकलवाइएहर तिथि कैसे चुनी गई
कोई दिन तभी सूची में आता है जब वह वाराणसी के लिए इन सब पर खरा उतरे:
- ऐसा नक्षत्र जिसे मुहूर्त ग्रंथ विवाह के लिए शुभ मानते हैं;
- कोई वर्जित तिथि या वार नहीं, और अमावस्या नहीं;
- गुरु और शुक्र में से कोई अस्त नहीं; ग्रहण, संक्रांति या अधिक मास नहीं;
- खरमास या चातुर्मास में नहीं।
परिवार की अपनी परंपरा और दोनों कुंडलियों पर आपके पंडित जी की राय सबसे पहले है। यह सूची निर्णय का वह हिस्सा है जो आकाश से आता है, एक स्थान के लिए गणना करके।
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